मुंबई/नई दिल्ली। शिवसेना UBT में बड़ी सियासी भूचाल के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के बागी रुख अपनाने के बाद पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों को दिल्ली से जयपुर शिफ्ट कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित “हृदय परिवर्तन” की संभावना को रोका जा सके।
शिवसेना UBT में बड़ी सियासी भूचाल बताया जा रहा है कि बागी सांसद पहले दिल्ली के एक होटल में ठहरे हुए थे। बाद में उन्हें विशेष रणनीति के तहत जयपुर भेजा गया। सूत्रों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे ने इन सांसदों से कॉन्फ्रेंस कॉल के माध्यम से बातचीत भी की थी।
शिवसेना UBT संकट :इस पूरे घटनाक्रम के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को पाला बदलने के लिए भारी रकम की पेशकश की गई है। हालांकि केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि ऐसी कोई बात है तो इसके प्रमाण पेश किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसदों का झुकाव शिंदे की ओर उनके नेतृत्व पर भरोसे की वजह से है, न कि किसी आर्थिक प्रलोभन के कारण।
अठावले ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे के लिए अब अपने सांसदों और विधायकों को एकजुट रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उनके अनुसार, नौ में से छह सांसद पहले ही उनका साथ छोड़ चुके हैं और यह पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर संकेत है।
दूसरी ओर, शिवसेना नेता शाइना एनसी ने भी संजय राउत पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और नेतृत्व से नाराजगी के कारण सांसद और विधायक लगातार दूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।
राजनीतिक तनाव को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने बागी सांसदों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है। गृह विभाग की सिफारिश पर छह सांसदों को तत्काल प्रभाव से Y+ श्रेणी की स्थानीय सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है और कई संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
इस बीच, शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा पर विपक्षी दलों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने भी इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौती बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है। यदि बागी सांसदों की संख्या बढ़ती है तो इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ संसद में विपक्ष की रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें उद्धव ठाकरे के अगले कदम और बागी सांसदों के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शिवसेना UBT में बड़ी सियासी भूचाल का असर आने वाले दिनों में और अधिक दिखाई दे सकता है। यदि बागी सांसदों की संख्या बढ़ती है तो पार्टी संगठन और नेतृत्व पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। वहीं महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना भी जताई जा रही है। उद्धव ठाकरे के सामने अब पार्टी को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती है। दूसरी ओर एकनाथ शिंदे गुट लगातार अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने में जुटा हुआ है। ऐसे में आगामी दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट केवल शिवसेना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव महाराष्ट्र की सत्ता और विपक्ष दोनों की रणनीति पर पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े राजनीतिक फैसले सामने आ सकते हैं।
